• Latest

    राजस्थान की प्रमुख सिचाई परियोजनाऐं

    राजस्थान की सिचाई परियोजनाऐं

    सिंचाई आधारभूत संरचना का अंग है। योजनाबद्ध विकास के 60 वर्षो के बाद भी राजस्थान आधारभूत संरचना की दृष्टि से भारत के अन्य राज्यों के मुकाबले पिछड़ा हुआ है। राज्य में कृषि योग्य भूमि का 2/3 भाग वर्षा पर निर्भर करता है। राजस्थान में कृषि की स्थति के बारे में मेने मेरी पिछली पोस्ट में विस्तार से बताया था। 

    शुष्क खेती
    वर्षा आधारित क्षेत्रों में भूमि की नमी को संरक्षित रखकर की जाने वाली खेती को शुष्क खेती कहते हैं। भारत में नहरों की कुल लम्बाई विश्व में सबसे अधिक है। सिंचित क्षेत्र भी सबसे अधिक है। परन्तु हमारी आवश्यकताओं से कम है।
    राजस्थान के कुल सिचित क्षेत्र का सबसे अधिक भाग श्री गंगानगर एवं सबसे कम भाग राजसमंद जिले में मिलता है। कुल कृषि क्षेत्र के सर्वाधिक भाग पर सिंचाई श्रीगंगानगर जिले में तथा सबसे कम चूरू जिले में मिलता है। राजस्थान कृषि प्रधान राज्य है। यहां के अधिकांश लोग जीवन - स्तर के लिए कृषि पर निर्भर है। कृषि विकास सिंचाई पर निर्भर करता है। राजस्थान के पश्चिमी भाग में मरूस्थल है। मानसून की अनिश्चितता के कारण ‘ कृषि मानसून का जुआ‘ जैसी बात कई बार चरितार्थ होती है।

    सिंचाई के साधन
    अप्रैल 1978 से सिंचाई के साधनों की परिभाषा निम्न प्रकार है।
    1. लघु सिंचाई का साधन - वह साधन जिससे 2000 हैक्टेयर तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है।
    2. मध्यम सिंचाई का साधन - वह साधन जिसमें 2000 हैक्टेयर से अधिक किन्तु 10000 हैक्टेयर से कम सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है।
    3. वृहत सिंचाई का साधन - वह साधन जिससे 10,000 हैक्टेयर से अधिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है।

    Read Also This Post:
    1. राजस्थान के भौतिक विभाग
    2. राजस्थान की जलवायु

    राजस्थान में सिंचाई के प्रमुख साधन

    1. कुए एवम् नलकूप(ट्यूब्वैल)
    ये राजस्थान में सिंचाई के प्रमुख साधन है। कुल सिंचित भुमि का लगभग 66प्रतिशत भाग कुंए एवं नलकूप से सिंचित होता है।
    कुए एवम् नलकूप से सर्वाधिक सिंचाई जयपुर में की जाती है। द्वितीय स्थान अलवर का है। जैसलमेर जिले में चंदन नलकूप मिठे पानी के लिए ‘थार का घड़ा‘ कहलाता है।
    2. नहरे
    राजस्थान में नहरों से कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग 33 प्रतिशत भाग सिंचित होता है। नहरों से सर्वाधिक सिंचाई श्री गंगानगर में होती है।
    3. तालाब
    तालाबों से सिंचाई कुल सिंचित क्षेत्र के 0.6 प्रतिशत भाग में होती है। तालाबों से सर्वाधिक सिंचाई भीलवाड़ा में दुसरा स्थान उदयपुर का है। राजस्थान के दक्षिणाी एवं दक्षिणी पूर्वी भाग में तालाबों से सर्वाधिक सिंचाई की जाती है।
    4. अन्य साधन
    अन्य साधनों में नदी नालों को सिंचाई के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इस साधन से कुल सिंचित क्षेत्र के 0.3 भाग में सिंचाई की जाती है।

    राजस्थान में प्रमुख बहुउद्देश्य परियोजनाएं

    पं. जवाहरलाल नेहरू ने बहुउद्देश्य परियोजनओं को ‘आधुनिक भारत के मन्दिर‘ कहा है।

    1. चम्बल नदी घाटी परियोजना

    चम्बल परियोजना का कार्य 1952 -54 में प्रारम्भ हुआ। यह राजस्थान व मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है। इसमें दानों राज्यों की हिस्सेदारी 50-50प्रतिशत है।
    क. गांधीसागर बांध
    यह बांध 1960 में मध्यप्रदेश की भानुपुरा तहसील में बनाया गया है। यह बांध चैरासीगढ़ में 8 कि.मी. पहले एक घाटी में बना हुआ है। इससे 2 नहरें निकाली गई है।
    बाईं नहर - बुंदी तक जाकर मेेज नदी में मिलती है।
    दांयी नहर - पार्वत नदी को पार करके मध्यप्रदेश में चली जाती है यहां पर गांधी सागर विधुत स्टेशन भी है।
    ख. राणा - प्रताप सागर बांध
    यह बांध गांधी सागर बांध से 48 कि.मी. आगे चित्तौड़गढ़ में चुलिया जल प्रपात के समीप रावतभाटा नामक स्थान पर 1970 में बनाया गया है।

    ग. जवाहर सागर बांध
    इसे कोटा बांध भी कहते हैं, यह राणा प्रताप सागर बांध से 38 कि.मी. आगे कोटा के बोरावास गांव में बना हुआ है। यहां एक विधुत शक्तिा ग्रह भी बनाया गया है।
    घ. कोटा बैराज
    यह कोटा शहर के पास बना हुआ है। इसमें से दो नहरें निकलती है।
    दायीं नहर - पार्वती व परवन नदी को पार करके मध्यप्रदेश में चली जाती है।
    बायी नहर - कोटा, बुंदी, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली मं जलापूर्ति करती है।

    Also Read:
    1. राजस्थानी भाषा एवं बोलियां
    2. राजस्थान की चित्र शैलियां व चित्रकला की प्रमुख संस्थाऐं

    2. भाखड़ा नांगल परियोजना

    भाखड़ा नांगल परियोजना भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियाजना है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश की संयुक्त परियोजना है। इसमें राजस्थान का हिस्सा 15.2 प्रतिशत है। हिमाचल प्रदेश का हिस्सा केवल जल विधुत के उत्पादन में ही है। सर्वप्रथम पंजाब के गर्वनर लुईस डैन ने सतलज नदी पर बांध बनाने का विचार प्रकट किया। इस बांध का निर्माण 1946 में प्रारम्भ हुआ एवं 1962 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह भारत का सबसे ऊंचा बांध है। भाखड़ा बांध के जलाशय का नाम गोबिन्द सागर है। यह 518 मीटर लम्बा 9.1 मीटर चौड़ा और 220 मीटर ऊंचा है।
    इस परियोजना के अन्तर्गत
    क. भाखड़ा बांध
    इसका निर्माण पंजाब के होशियारपुर जिले में सतलज नदी पर भाखड़ा नामक स्थाप पर किया गया है। इसका जलाशय गोविन्द सागर है। इस बांध को देखकर पं. जवाहरलाल नेहरू ने इसे चमत्कारिक विराट वस्तु की संज्ञा दी और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को आधुनिक भारत का मन्दिर कहा है।
    ख. नांगल बांध
    यह बांध भाखड़ा से 12 कि.मी. पहले एक घाटी में बना है इससे 64 कि.मी. लम्बी नहर निकाली गई है जो अन्य नहरों को जलापूर्ति करती है।
    ग. भाखड़ा मुख्य नहर
    यह पंजाब के रोपड़ से निकलती है यह हरियाणा के हिसार के लोहाणा कस्बे तक विस्तारित है। इसकी कुल लम्बाई 175 कि.मी. है।
    इसके अलावा इस परियोजना में सरहिन्द नहर, सिरसा नहर, नरवाणा नहर,बिस्त दो आब नहर निकाली गई है। इस परियोजना से राजस्थान के श्री गंगानगर व हनुमानगढ़ चुरू जिलों को जल व विधुत एवं श्री गंगानगर,हनुमानगढ़, चुरू, झुझुनू, सीकर बीकानेर को विधुत की आपूर्ति होती है।

    3. व्यास परियोजना

    यह पंजाब, राजस्थान, हरियाणा में है। इस परियोजना के प्रथम चरण में 1बांध, व्यास लिंक का निर्माण और एक विधुत ग्रह का निर्माण किया गया है। द्वितीय चरण में व्यास नदी पर पौंग बांध बनाया गया। इससे IGNP में नियमित जलापूर्ति रखने में मदद मिलती है।
    रावी - व्यास जल विवाद
    जल के बंटवारे के लिए 1953 में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, जम्मु - कश्मीर,दिल्ली, हिमाचल प्रदेश राज्यों के बीच एक समझौता हुआ इसमें सभी राज्यों के लिए अलग- अलग पानी की मात्रा निर्धारित की गई लेकिन इसके बाद भी यह विवाद थमा नहीं तब सन् 1985 में राजीव गांधी लौंगवाला समझौते के अन्तर्गत न्यायमूर्ति इराडी की अध्यक्षता में इराडी आयोग बनाया गया था। इस आयोग ने राजस्थान के लिए 86 लाख एकड़ घन फीट जल की मात्रा तय की है।

    4. माही - बजाज सागर परियोजना

    यह राजस्थान एवं गुजरात की संयुक्त परियोजना है। 1966 में हुए समझौते के अनुसार राजस्थान का हिस्सा 45 प्रतिशत व गुजरात का हिस्सा 55 प्रतिशत है। इस परियोजना में गुजरात के पंच महल जिले में माही नदी पर कड़ाना बांध का निर्माण किया गया है। इसी परियोजना के अंतर्गत बांसवाड़ा के बोरखेड़ा गांव में माही बजाज सागर बांध बना हुआ है। इसके अलावा यहां 2 नहरें, 2विधुत ग्रह, 2 लघु विधुत ग्रह व 1 कागदी पिक अप बांध बना हुआ है। 1983में इन्दिरा गांधी ने जल प्रवाहित किया। इस परियोजना से डुंगरपुर व बांसवाड़ा जिलों की कुछ तहसीलों को जलापूर्ति होती है।

    Read Also This Post:
    1. राजस्थान के प्रमुख मेले एवं उर्स
    2. राजस्थान की स्थिति एवं विस्तार

    वृहत परियोजनाएं

    1. इन्दिरा गांधी नहर परियोजना(IGNP)

    यह परियोजना पूर्ण होने पर विश्व की सबसे बड़ी परियोजना होगी इसे प्रदेश की जीवन रेखा/मरूगंगा भी कहा जाता है। पहले इसका नाम राजस्थान नहर था। 2 नवम्बर 1984 को इसका नाम इन्दिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया है। बीकानेर के इंजीनियर कंवर सैन ने 1948 में भारत सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन पेश किया जिसका विषय ‘ बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता‘ था। IGNP का मुख्यालय(बोर्ड) जयपुर में है।

    इस नहर का निर्माण का मुख्य उद्द्देश्य रावी व्यास नदियों के जल से राजस्थान को आवंटित 86 लाख एकड़ घन फीट जल को उपयोग में लेना है। नहर निर्माण के लिए सबसे पहले फिरोजपुर में सतलज, व्यास नदियों के संगम पर 1952 में हरिकै बैराज का निर्माण किया गया। हरिकै बैराज से बाड़मेर के गडरा रोड़ तक नहर बनाने का लक्ष्य रखा गया। जिससे श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर को जलापूर्ति हो सके।

    नहर निर्माण कार्य का श्री गणेश तात्कालिक ग्रहमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत ने31 मार्च 1958 को किया। 11 अक्टुबर 1961 को इससे सिंचाई प्रारम्भ हो गई, जब तात्कालिन उपराष्ट्रपति डा. राधाकृष्णनन ने नहर की नौरंगदेसर वितरिका में जल प्रवाहित किया था।

    IGNP के दो भाग हैं। प्रथम भाग राजस्थान फीडर कहलाता है इसकी लम्बाई204 कि.मी.(169 कि.मी. पंजाब व हरियाणा + 35 कि.मी. राजस्थान) है। जो हरिकै बैराज से हनुमानगढ़ के मसीतावाली हैड तक विस्तारित है। नहर के इस भाग में जल का दोहन नहीं होता है।

    IGNP का दुसरा भाग मुख्य नहर है। इसकी लम्बाई 445 किमी. है। यह मसीतावाली से जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे तक विस्तारित है। इस प्रकारIGNP की कुल लम्बाई 649 किमी. है। इसकी वितरिकाओं की लम्बाई9060 किमी. है। IGNP के निर्माण के प्रथम चरण में राजस्थान फीडर सूरतगढ़, अनुपगढ़, पुगल शाखा का निर्माण हुआ है। इसके साथ-साथ 3075किमी. लम्बी वितरक नहरों का निर्माण हुआ है।

    राजस्थान फीडर का निर्माण कार्य सन् 1975 में पूरा हुआ। नहर निर्माण के द्वितीय चरण में 256 किमी. लम्बी मुख्य नहर और 5112 किमी. लम्बी वितरक प्रणाली का लक्ष्य रखा गया है। नहर का द्वितीय चरण बीकानेर के पूगल क्षेत्र के सतासर गांव से प्रारम्भ हुआ था। जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे में द्वितीय चरण पूरा हुआ है। इसलिए मोहनगढ़ कस्बे को IGNP का ZERO POINT कहते हैं।

    मोहनगढ़ कस्बे से इसके सिरे से लीलवा व दीघा दो उपशाखाऐं निकाली गयी है। द्वितीय चरण का कार्य 1972-73 में पुरा हुआ है। 256 किमी. लम्बी मुख्य नहर दिसम्बर 1986 में बनकर तैयार हुई थी। 1 जनवरी 1987 को वी. पी.(विश्व नाथप्रताप) सिंह ने इसमें जल प्रवाहित किया।

    IGNP नहर की कुल सिंचाई 30 प्रतिशत भाग लिफ्ट नहरों से तथा 70प्रतिशत शाखाओं के माध्यम से होता है।

    रावी - व्यास जल विवाद हेतु गठित इराड़ी आयोग(1966) के फैसले से राजस्थान को प्राप्त कुल 8.6 एम. ए. एफ. जल में से 7.59 एम. ए. एफ. जल का उपयोग IGNP के माध्यम से किय जायेगा।

    IGNP के द्वारा राज्य के आठ जिलों - हनुमानगढ़, श्री गंगानगर, चूरू,बीकानेर, जोधपुर, नागौर, जैसलमेर एवं बाड़मेर में सिंचाई हो रही है या होगी। इनमें से सर्वाधिक कमाण्ड क्षेत्र क्रमशः जैसलमेर एवं बीकानेर जिलों का है। IGNP से 7 शाखाएं निकाली गयी है जो निम्न है -

    क्र. स.   लिफ्ट नहर का पुराना नाम        लिफ्ट नहर का नया नाम                          लाभान्वित जिले
    1.         गंधेली(नोहर) साहवा लिफ्ट       चैधरी कुम्भाराम लिफ्ट नहर                     हनुमानगढ़,चुरू, झुंझुनू
    2.         बीकानेर - लुणकरणसर लिफ्ट   कंवरसेन लिफ्ट नहर                                श्री गंगानगर,बीकानेर
    3.         गजनेर लिफ्ट नहर                    पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर                बीकानेर,नागौर
    4.         बांगड़सर लिफ्ट नहर                 भैरूदम चालनी वीर तेजाजी लिफ्ट नहर     बीकानेर
    5.         कोलायत लिफ्ट नहर                 डा. करणी सिंह लिफ्ट नहर                       बीकानेर,जोधपुर
    6.         फलौदी लिफ्ट नहर                   गुरू जम्भेश्वर जलो उत्थान योजना           जोधपुर,बीकानेर,जैसलमेर
    7.         पोकरण लिफ्ट नहर                  जयनारायण व्यास लिफ्ट                         जैसलमेर,जोधपुर
    8.        जोधपुर लिफ्ट नहर                   राजीवगांधी लिफ्ट नहर                             जोधपुर
    (170 किमी. + 30 किमी. तक पाईप लाईन)

    IGNP में पानी के नियमित बहाव के लिए निम्न उपाय है।
    1. व्यास - सतलज नदी पर बांध
    2. व्यास नदी पर पौंग बांध
    3. रावी - व्यास नदियों के संगम पर पंजाब के माधोपुर नामक स्थान पर एक लिंक नहर का निर्माण।

    गंधेली साहवा लिफ्ट नहर से जर्मनी के सहयोग से ‘आपणी योजना‘ बनाई गई है। इस योजना के प्रथम चरण में हनुमानगढ़, चुरू, और इसके द्वितीय चरण में चुरू व झुझुनू के कुछ गांवों में जलापुर्ति होगी।
    IGNP की सूरतगढ़ व अनूपगढ़ शाखाओं पर 3 लघु विधुत ग्रह बनाये गये है। भविष्य में इस नहर को कांडला बन्दरगाह से जोड़ने की योजना है। जिससे यह भारत की राइन नदी बन जाएगी।

    डा. सिचेन्द द्वारा आविष्कारित लिफ्ट ट्रांसलेटर यंत्र नहर के विभिन्न स्थानों पर लगा देने से इससे इतनी विधुत उत्पन्न की जा सकती है जिससे पूरे उत्तरी - पश्चिमी राजस्थान में नियमित विधुत की आपूर्ति हो सकती है।

    अन्य परियोजनाएं

    1. जवाई बांध

    यह बांध लूनी नदी की सहायक जवाई नदी पर पाली के सुमेरपुर में बना हुआ है। इसका निर्माण जोधपुर के महाराजा उम्मेदसिंह ने 13 मई 1946 को शुरू करवाया, 1956 में इसका निर्माण कार्य पुरा हुआ।
    पहले इस बांध को अंग्रेज इंजीनियर एडगर और फर्गुसन के निर्देशन में शुरू करवाया बाद में मोतीसिंह की देखरेख में बांध का कार्य पूर्ण हुआ। इसे मारवाड़ का ‘अमृत सरोवर‘ भी कहते हैं। इससे एक नहर और उसकी शाखाएं निकाली गयी हैं।
    जवाई बांध में पानी की आवक कम होने पर इसे उदयपुर के कोटड़ा तहसील में निर्मित सेई परियोजना से जोड़ा गया है। 9 अगस्त 1977 को सेई का पानी पहली बार जवाई बांध में डाला गया इस बांध के जीर्णोद्धार का कार्य 4 अप्रैल2003 को सोनिया गांधी ने शुरू किया।

    2. मेजा बांध

    यह बांध भीलवाड़ा के माण्डलगढ़ कस्बे में कोठारी नदी पर है। इससे भीलवाड़ा शहर को पेयजल की आपूर्ति होती है। मेजा बांध की पाल पर मेजा पार्क को ग्रीन माउण्ट कहते हैं। यह माउण्ट फुलों और सब्जियों के लिए प्रसिद्ध है।

    3. पांचणा बांध

    करौली जिले के गुड़ला गांव में बालू मिट्टी से निर्मित बांध है। इस बांध में भद्रावती, बरखेड़ा, अटा, माची, भैसावर पांच नदियां आकर गिरती है। इसलिए इसे पांचणा बांध कहते है। यह मिट्टी से निर्मित राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है यह अमेरिका के आर्थिक संयोग से बनाया गया है। इससे करौली,सवाईमाधोपुर, बयाना(भरतपुर) में जलापूर्ति होती है।

    4. मानसी वाॅकल परियोजना

    यह राजस्थान सरकार व हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड की संयुक्त परियोजना है। इसमें 70 प्रतिशत जल का उपयोग उदयपुर व 30 प्रतिशत जल का उपयोग हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड करता है। इस परियोजना में 4.6 कि.मी. लम्बी सुरंग बनी हुई है। यह भारत व राजस्थान की सबसे बड़ी जल सुरंग है।

    5. पार्वती परियोजना(आंगई बांध)

    इस योजना में धौलपुर जिल में पार्वती नदी पर 1959 में एक बांध का निर्माण किया गया। इससे धौलपुर जिले में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है।

    6. ओराई सिंचाई परियोजना

    इसमें चित्तौड़गढ़ जिले में भोपालपुरा गांव के पास ओराई नदी पर एक बांध का निर्माण किया गया। इस बांध से एक नहर निकाली गई है जिसकी लम्बाई34 कि.मी. है। इस परियोजना से चित्तौड़गढ़ एवं भीलवाड़ा जिले में सिंचाई सुविधा प्राप्त हो रही है।

    7. गम्भीरी योजना

    इस बांध का निर्माण निम्बाहेड़ा(चित्तौड़गढ़) के पास गम्भीरी नदी पर 1956में किया गया। यह मिट्टी से निर्मित बांध है। इस बांध से चित्तौड़गढ़ जिले को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है।

    8. इन्दिरा लिफ्ट सिंचाई परियोजना

    यह करौली जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है। इसमें चम्बल नदी के पानी को कसेडु गांव(करौली) के पास 125 मीटर ऊंचा उठाकर करौली,बामनवास(सवाईमाधोपुर) एवम् बयाना(भरतपुर) में सिंचाई सुविधा प्रदान की गई।

    No comments

    Post Top Ad

    Post Bottom Ad