• Latest

    उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति के पूर्वानुमान

    उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति के पूर्वानुमान

    उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति संबंधी आपदाओं का अपचयन, जोखिम विश्लेषण, सुभेद्यता विश्लेषण, तैयारी एवं आयोजना, पूर्व चेतावनी, रोकथाम एवं उपशमन सहित अनेक कारकों पर निर्भर करता है। दक्षिण एशिया की सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों के कारण पूर्व चेतावनी इसके लिए एक प्रमुख घटक है। पूर्व चेतावनी घटक में चक्रवात मानीटरन एवं पूर्वानुमान में कौशल, प्रभावी चेतावनी उत्पादों का विकास एवं प्रसार, आपातकालीन अनुक्रिया इकाइयों के साथ समन्वय तथा सरकारी पूर्वानुमानों एवं चेतावनियों की विश्वसनीयता के बारे में लोगों की धारणा शामिल हैं।
    tropical cyclone Image, Ushankatibandhiya chakravat
    उष्ण कटिबंधीय चक्रवात
    उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के प्रभावी प्रबंधन के लिए पूर्व चेतावनी के सभी घटकों को नवीनतम प्रौद्योगिकी से लगातार अपग्रेड करना महत्वपूर्ण है। उष्ण कटिबंधीय चक्रवात पूर्वानुमान में मुख्यतः चक्रवात की उत्पत्ति और अगले कुछ दिनों में अवस्थिति/पथ एवं तीव्रता का पूर्वानुमान होता है। इसका उद्देश्य चक्रवात से जुड़े खराब मौसम जैसे कि भारी बारिश, झंझावात, ऊंची लहरें, तूफान और तटीय आप्लावन आदि का भी पूर्वानुमान प्रदान करना है।

    उष्णकटिबंधीय चक्रवात क्या है? 

    उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक घूमने वाली अत्यधिक निम्नदाब प्रणाली है जिसमें केंद्रीय वायु दाब आसपास के स्थानों से 5 से 6 मिली बार तक कम हो जाता है और अधिकतम अविच्छिन्न हवा (maximum sustained wind) की गति 34 नॉट्स (62 कि. मी. प्रति घंटे ) तक पहुँच जाती है। यह लगभग 150-800 किमी तक फैला एक विशाल प्रचंड चक्र है, जो एक केंद्र के चारों ओर घूमता हुआ समुद्र की सतह पर प्रतिदिन लगभग 300 से 500 किमी की गति से बढ़ता है। साइक्लोन शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द’साइक्लोस’ (cyclos) से हुई है जिसका अर्थ “सांप की कुंडली” है। उन्नीसवीं सदी के मध्य में ब्रिटिश शासन के दौरान कोलकाता में एक रिपोर्टर के रूप में कार्य करने वाले हैनरी पैडिंगटन ने इन तूफानों का नाम साइक्लोन रखा ।
    एक परिपक्व "उष्णकटिबंधीय चक्रवात" के लिए हरिकेन’ और ‘टाइफून‘ जैसे क्षेत्र विशिष्ट नाम हैं । उत्तरी अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत महासागर के ऊपर इन्हे ‘हरिकेन’ (Hurricanes) तथा उत्तर पश्चिमी प्रशांत महासागर में इन्हे ‘टाइफून’ (Typhoons) कहा जाता है।


    Read also this post:-

    पूर्वानुमान एवं निर्णय समर्थन तंत्र के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया

    मानक प्रचालन प्रक्रिया मैनुअल में विभिन्न प्रकार की विश्लेषणात्मक प्रक्रियाओं का वर्णन किया गया है। उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की की उत्पत्ति विश्लेषण, पूर्वानुमान एवं विनिर्णयन प्रक्रिया, विज्ञान आधारित अवधारणात्मक मॉडलों, गतिकीय एवं सांख्यिकीय मॉडलों, मौसम वैज्ञानिक डेटासेटों, प्रौद्योगिकी एवं विशेषज्ञता के मिश्रण से बनी है। इस प्रयोजनार्थ, विभिन्न मौसम प्राचलों, उपग्रह, राडार एवं संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल उत्पादों को आलेखित एवं विश्लेषित करने के लिए अंकीय परिवेश में एक निर्णय समर्थन तंत्र का प्रयोग किया जाता है। इस संकर प्रणाली में, उच्च गुणवत्ता के विश्लेषण एवं पूर्वानुमान उत्पाद तैयार करने, पिछले एवं 120 घंटे तक के पूर्वानुमान पथ तैयार करने, पथ पूर्वानुमान में अनिश्चितता को चित्रित करने तथा उष्ण कटिबंधीय चक्रवात के विभिन्न क्षेत्रों में पवन पूर्वानुमान हेतु सहदर्शी पद्धति को आधुनिक आरेखीय एवं भौगोलिक इंटरफेस सिस्टम द्वारा समर्थित संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों पर अधिचित्रित किया जा सकता है। इसके अलावा, भारत मौसम विभाग एवं पड़ोसी देशों के राडार नेटवर्क, भारत मौसम विभाग एवं अंतरराष्ट्रीय केंद्रों तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय केंद्रों से डेटा, विश्लेषण एवं पूर्वानुमान उत्पाद प्राप्त करने के लिए वेबसाइटों की भी मदद ली जाती है। प्रक्रिया के स्वचालन से प्रणाली की दक्षता, भारत मौसम विभाग की प्रतिष्ठा तथा चेतावनी उत्पादों की उपादेयता बढ़ी है।

    चक्रवात की उत्पत्ति का मानीटरन एवं विश्लेषण

    उत्तर भारत के महासागर के ऊपर दबाव (17-27 नॉट) का क्षेत्र बनने पर कहा जाता है कि चक्रवात की उत्पत्ति हो चुकी है। चक्रवात की उत्पत्ति के पूर्वानुमान हेतु समुद्र सतह तापमान महासागर की तापीय ऊर्जा, ऊर्ध्वाधर पवन दबाव, निचले स्तर की भ्रमिलता, मध्य स्तर की सापेक्ष आर्द्रता, ऊपरी स्तर का अपसरण, आर्द्र स्थैतिक स्थिरता तथा निम्न एवं उच्च स्तर पवन आदि जैसी व्याप्त पर्यावरणिक परिस्थितियों पर भी विचार किया जाता है। संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल विश्लेषण एवं पूर्वानुमान के इन सभी क्षेत्रों पर भी विचार किया जाता है। उपग्रह एवं राडार प्रेक्षणों में अभिलाक्षणिक विशेषताओं के विकास को भी ध्यान में रखा जाता है। चक्रवात की उत्पत्ति को मॉनीटर करने के लिए उत्पत्ति प्राचलों का मूल्यांकन निम्नलिखित चरणों में किया जाता है :
    चरण I : एसएसटी, 26 डीग्री सेंटीग्रेड समताप गहराई तथा महासागर तापीय ऊर्जा।
    चरण II : गहरी एवं आद्र वायुमंडलीय परत के माध्यम से स्थितिजन्य अस्थिरता।
    चरण III : पहले से मौजूद विक्षोभ।
    चरण IV : पर्यावरणिक स्थितियाँ (ऊर्ध्वाधर पवन दबाव, निम्न स्तर भ्रमिलता, उच्च स्तर अपसरण आदि)
    चरण V : संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान तथा चक्रवात की उत्पत्ति के लिए गतिकीय एवं साख्यिकीय मॉडल पूर्वानुमान।


    उत्तर भारतीय महासागर के लिए चार चरणों नामतः निचले स्तर पर भ्रमिलता, मध्य क्षोभमंडलीय सापेक्ष आर्द्रता, मध्य क्षोभमंडलीय अस्थिरता और ऊर्ध्वाधर पवन दबाव के उत्पाद के रूप में एक उत्पत्ति संभाव्यता प्राचल विकसित किया गया है (कोटाल एवं भट्टाचार्य, 2014)। इस उत्पत्ति संभाव्यता प्राचल का प्रचालनात्मक इस्तेमाल प्रारंभिक चरण में चक्रवात की उत्पत्ति के पूर्वानुमान हेतु किया जाता है। उत्पत्ति प्राचल का सात दिन तक का ग्रिड प्वाइंट विश्लेषण एवं पूर्वानुमान रीयल टाइम में तैयार किया जाता है। उत्पत्ति पर आधिकारिक पूर्वानुमान प्रतिदिन 0300 यूटीसी पर प्रेक्षणों के आधार पर अगले 72 घंटों के दौरान चक्रवात की उत्पत्ति की संभावना प्रदान करता है जिसे 0600 यूटीसी पर जारी किया जाता है।

    Note:-

    उष्ण कटिबंधीय चक्रवात पथ पूर्वानुमान

    प्रारंभिक अवस्थिति एवं तीव्रता का पता लगाने के बाद पथ और तीव्रता के पूर्वानुमान का प्रयास किया जाता है। जहाँ अल्पावधि पूर्वानुमान (12/24 घंटे तक) में सहदर्शी एवं उपग्रह/राडार मार्गदर्शन सहायक होता है, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान का इस्तेमाल मुख्यतः 24-120 घंटे के पूर्वानुमान, सर्वमान्य पूर्वानुमान हेतु किया जाता है जो संख्यात्मक पूर्वानुमान को पूरे अथवा आंशिक रूप में इकट्ठा करता है तथा आधिकारिक पूर्वानुमान जारी करने के लिए सहदर्शी एवं सांख्यिकीय मार्गदर्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
    पूर्वानुमान क्षमता में हाल के विकास को देखते हुए भारत मौसम विभाग ने 2009 में अगले 72 घंटों तथा 2013 में 120 घंटों तक वैध वस्तुनिष्ठ चक्रवात पथ पूर्वानुमान की शुरुआत की है। उष्ण कटिबंधीय चक्रवात पूर्वानुमान 3-3 घंटे के अंतराल पर दिन में 6 बार जारी किए जाते हैं जो 00, 03, 06, 09, 12, 15, 18 और 21 यूटीयू प्रेक्षणों पर आधारित होते हैं। ये पूर्वानुमान उपर्युक्त प्रेक्षण समय के लगभग 3 घंटे बाद जारी किए जाते हैं।

    क्वाड्रैंट विंड रेड्डी पूर्वानुमान

    जहाजों की आवश्यकता के अनुसार प्रत्येक क्वाड्रैंट में (पश्चिमोत्तर, पूर्वोत्तर, दक्षिण पूर्व, दक्षिण पश्चिम) 34 नॉट, 50 नॉट और 64 नॉट की अधिकतम पवन त्रिज्या की चक्रवात पवन त्रिज्याएं तैयार की जाती हैं। उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की पवन त्रिज्या का प्रारंभिक आकलन एवं पूर्वानुमान वस्तुनिष्ठ होता है और यह डेटा की उपलब्धता, जलवायु एवं विश्लेषण पद्धतियों पर अत्यधिक निर्भर करता है। विभिन्न प्रेक्षणों के अभाव में जलवायु पर वस्तुनिष्ठता एवं निर्भरता बढ़ जाती है। भारत मौसम विभाग ने अक्तूबर, 2010 में 72 घंटे तक वैध चक्रवात पवन त्रिज्या मानीटरन एवं पूर्वानुमान उत्पाद की शुरुआत की। इसे 2013 में 120 घंटों तक बढ़ाया गया। भारत मौसम विभाग द्वारा जारी सर्वमान्य पूर्वानुमान संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों के संख्यात्मक पूर्वानुमान तथा सहदर्शी एवं सांख्यिकीय मार्गदर्शन (भारत मौसम विभाग, 2013) पर आधारित है।

    खराब मौसम पूर्वानुमान

    उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति से इसके स्थलावतरण के दौरान तीन प्रकार की खराब मौसम परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं : भारी बारिश, झंझावात और प्रबल तूफान। इन खराब मौसम परिस्थितियों पूर्वानुमान पद्धतियों को संक्षेप में बताया गया है।


    भारी बरसात
    भारी बरसात के पूर्वानुमान/चेतावनी में (1) प्रारंभ का समय (2) अवधि (3) क्षेत्र और (4) भारी बारिश की तीव्रता शामिल होती है। भारी बारिश की पूर्वानुमान पद्धतियों में शामिल हैं : (1) सहदर्शी (2) जलवायु (3) उपग्रह (4) राडार और (5) संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान तकनीक। जहाँ संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल अलग-अलग लीड अवधियों का पूर्वानुमान प्रदान करते हैं, उपग्रह एवं राडार पिछले 3……….12 घंटों के दौरान मात्रात्मक वर्षण अनुमान प्रदान करते हैं। पूर्वानुमान जारी करने के लिए उपग्रह एवं राडार द्वारा आकलित वर्षा की तीव्रता एवं उसके स्थानिक वितरण का बहिर्वेशन किया जाता है। सहदर्शी एवं जलवायु पद्धति में, बारिश की तीव्रता तथा स्थानिक वितरण की सहदर्शी जलवायु का प्रयोग किया जाता है।

    Important GK Questions for you:-

    झंझावात
    झंझावात के पूर्वानुमान में (1) प्रारंभ का समय (2) अवधि (3) क्षेत्र और (4) झंझावात की तीव्रता शामिल होती है। झंझावात के पूर्वानुमान पद्धतियों में शामिल हैं : (1) सहदर्शी (2) जलवायु (3) उपग्रह (4) राडार (5) संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान और (6) गतिकीय सांख्यिकीय तकनीक शामिल है।
    तूफानी लहरें (स्टार्म सर्ज)
    चक्रवात की उत्पत्ति के कारण समुद्र के पानी का खगोलीय ज्वार स्तर से ऊपर उठना तूफानी लहर कहलाता है। यह केंद्र में दाब में गिरावट, अधिकतम पवन की त्रिज्या, स्थलावतरण के बिंदु एवं समुद्री लहरों से अन्योन्य क्रिया, खगोलीय ज्वार, बारिश, नदी अपवाह, समुद्र की गहराई, तटीय ज्यामिति आदि पर निर्भर करती है। तूफानी लहरों के पूर्वानुमान में (1) प्रारंभ का समय (2) अवधि (3) क्षेत्र और लहरों की ऊंचाई शामिल होती है। तूफानी लहर एवं तटीय जलप्लावन की पूर्वानुमान तकनीक में (1) भारत मौसम विभाग का नोमोग्राम (घोष मॉडल), (2) आइआरटी दिल्ली मॉडल (दुबे एवं अन्य, 2013) और (3) आइएनसीओआइएस, हैदराबाद मॉडल शामिल है।

    निष्कर्ष

    यद्यपि हाल के वर्षों में पर्याप्त प्रगति हुई है, आगे और सुधार की गुंजाइश अभी भी है। इसमें आगे और सुधार के लिए पूर्वानुमान प्रदर्शन परियोजनाओं, विमान द्वारा जाँच, प्रेक्षणात्मक नेटवर्क में वृद्धि, एचडब्ल्यूआरएफ मॉडल की शुरुआत, डेटा आमेलन, संश्लिष्ट जलावर्त उत्पादन, एमएमई एवं ईपीएस उत्पादों के प्रचालन जैसे विभिन्न पहलों का प्रयास किया जा रहा है।

    No comments

    Post Top Ad

    Post Bottom Ad