प्रथम विश्वयुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी - First World War GK - Exam Prepare -->

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Nov 22, 2017

प्रथम विश्वयुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी - First World War GK

प्रथम विश्वयुद्ध (First World War)

       20वीं शताब्दी के साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद के घातक परिणाम 1914 ईस्वी में प्रथम विश्वयुद्ध के रूप में सामने आए। फ्रांस की क्रांति ने नेपोलियन बोनापार्ट को यूरोप का भाग्य विधाता बनाया, परंतु यूरोप की निरंकुश शक्तियां नेपोलियन को वाटरलू के युद्ध मे पराजित करने में सफल रहीं। इन शक्तियों में वियना में एक सम्मेलन आयोजित किया जिसकी अध्यक्षता आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मेटरनिख ने की। मेटरनिख घोर प्रतिक्रियावादी तथा लोकतंत्र का प्रबल विरोधी था। उसने यूरोप के मानचित्र में परिवर्तन करके राष्ट्रीय भावनाओं को कुचलने का हर संभव प्रयास किया, परंतु अब तक यूरोप में स्वतंत्रता समानता और राष्ट्रीयता की भावना है उग्र रूप धारण कर चुकी थी। इसलिए यूरोप में उग्र राष्ट्रीयता की आंधी चलने लगी, जिसके परिणाम स्वरुप इटली का एकीकरण हो गया तथा बिस्मार्क के नेतृत्व में महान जर्मन साम्राज्य संगठित हो गया।
इंग्लैंड तेजी के साथ एशिया और अफ्रीका में उपनिवेश बस आने लगा। उपनिवेशों की प्राप्ति की दौड़ में यूरोप के अन्य देश भी कूद पड़े। टर्की साम्राज्य में निवेश करने वाला बाल्कन प्रदेश की सारी जातियां भी अपनी स्वतंत्रता के लिए प्रयत्नशील हो गई। इंग्लैंड, रूस, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, तथा इटली के राष्ट्रीय हित आपस में टकराने से आपसी मनमुटाव तथा ईर्ष्या भाव बढ़ता ही गया। सबसे पहले जर्मनी के प्रधानमंत्री बिस्मार्क ने फ्रांस को यूरोप से अलग-थलग रखने तथा अपने को शक्तिशाली बनाने के लिए गुटबंदी की कूटनीति को जन्म दिया। 1882 ईस्वी में जर्मनी के नेतृत्व में त्रिगुट (जर्मनी, आस्ट्रिया और इटली) बन गए। त्रिगुट के विरोध में इंग्लैंड, फ्रांस और रूस ने मिलकर त्रि-राष्ट्रीय मैत्री गुट का निर्माण कर लिया।

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       जुलाई, 1980 में टर्की की युवा शक्ति क्रांति ने यूरोप की राजनीति में भयंकर हलचल उत्पन्न कर दी। इस क्रांति के बाद घटित घटनाओं का क्रम निश्चित रूप से सर्वथा विनाशकारी था। इस प्रकार त्रि मैत्री गुट तथा त्रि-राष्ट्रीय मैत्री गुट की आपसी प्रतिस्पर्धा में यूरोप में युद्ध का बारूद तैयार कर दिया और सेराजेवो हत्याकांड ने इस बारूद में चिंगारी लगा कर प्रथम युद्ध प्रथम विश्व युद्ध का विस्फोट कर दिया।
प्रथम विश्व युद्ध बड़ा भयानक तथा विनाशकारी था 28 जुलाई सन 1914 ईस्वी से लेकर 11 नवंबर 1918 तक किया युद्ध पूरी भीषणता के साथ चलता रहा।


प्रथम विश्व युद्ध के कारण

1) गुप्त सन्धियां
2) सैनिकवाद
3) उग्र राष्ट्रीयता
4) साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का प्रसार

Note:-

प्रथम विश्वयुद्ध की विशेषताएं

      प्रथम विश्व युद्ध अपने पूर्ववर्ती सभी युद्धों में सबसे लंबा सबसे भयानक और सबसे भीषण था इस युद्ध का आरंभ 28 जुलाई 1914 को हुआ और 4 वर्षों तक निरंतर चलता रहा 11 नवंबर 1918 को जब जर्मन सेना ने हथियार डाल कर आत्मसमर्पण किया तभी इस भयंकर युद्ध का अंत हो पाया।

      प्रथम विश्व युद्ध महायुद्ध विश्वव्यापी था यह युद्ध केवल ऑस्ट्रिया जर्मनी बुल्गारिया टर्की इंग्लैंड फ्रांस रूस आदि देशो के बीच ही नहीं लड़ा गया अपितु इस युद्ध में जापान भारत अमेरिका जैसे देश भी सम्मिलित हुए इस युद्ध में आर्सेनिक जनता ने भी अत्यधिक संख्या में भाग लिया।



       प्रथम विश्व युद्ध में ऐसे नए संहारक हथियारों तथा विध्वंसक युद्ध सामग्री का प्रयोग किया गया इस। युद्ध में मानव जाति में टैंक पनडुब्बी तथा हवाई जहाजों की विनाशकारी शक्ति का प्रदर्शन देखा स्थल युद्ध में विशालकाय टैंकों ने भीषण तबाही मचाई समुंद्र मे अंदर जर्मन पनडुब्बियों ने शत्रुओं को अपार क्षति पहुंचाई हवा आकाश में बर्फ पर शक हवाई जहाजों तथा विषय ले गए सोने जन और संपत्ति को विनाश किया उस का अनुमान लगाना भी कठिन है आधुनिक अस्त्र शस्त्र तथा विनाशक युद्ध सामग्री में प्रयोग से इस युद्ध को बड़ा भीषण और भयानक बना दिया।

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प्रथम विश्व युद्ध की प्रमुख घटनाएं

1. जर्मनी का बेल्जियम तथा फ्रांस से युद्ध (पश्चिमी मोर्चा)
2. पूर्वी मोर्चा का युद्ध
3. इटली का युद्ध
4. सर्बिया का पतन
5. सन 1916 की घटनाएं
6. समुद्री युद्ध
7. रूस का युद्ध से अलग होना
8. संयुक्त राज्य अमेरिका का युद्ध में प्रवेश
9. सुदूर पूर्व में युद्ध

प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम

        प्रथम विश्वयुद्ध 20वी शताब्दी में एक  महत्वपूर्ण तथा भयंकर घटना थी यह युद्ध पहले के सभी युद्धों से भीषण और विनाशकारी सिद्ध हुआ। विश्व के लगभग 36 देशों ने इस युद्ध में भाग लियाइस युद्ध में लड़ने वालों की संख्या 6 करोड़ 50 लाख थी, जिसमें 1 करोड़ 50 लाख सैनिक मारे गए, तथा दो करोड़ से अधिक घायल हो गए। जिन मे 70 लाख व्यक्ति बिल्कुल अपंग हो गए थे। इस जनक्षति के साथ इस युद्ध में धनवा संपत्ति की भी अपार क्षति हुई। दोनों पक्षों की ओर से इस युद्ध में लगभग 1 खरब 67 अरब डालर खर्च हुए।  लगभग 12 अरब डॉलर की संपत्ति इस युद्ध में नष्ट हो गई इस युद्ध में इंग्लैंड को धन जन की भारी हानि उठानी पड़ी इस जन धन की क्षति के अतिरिक्त प्रथम विश्व युद्ध में अन्य परिणाम भी निकले।

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