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    चिंता संबधी आदतों को छोड़ने की छः विधियाँ

    चिंता संबधी आदतों को छोड़ने की छः विधियाँ

    1. स्वयं को व्यस्त रखिए

    अपने को बिज़ी रखना ही, चिंताओं से बचना है अपने को व्यस्त रखने के लिए अपने मन को कोई ना कोई काम देते रहिये। ताकि उसके पास व्यर्थ सोचने का समय ही ना हो। अच्छा साहित्य पढ़ने में , किसी कल्याण के प्रति समय लगाना और अपने हर दिनचर्या के काम में रूचि से करना इत्यदि।
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    2. छोटी-छोटी बातों पर परेशान न हों

    कोई भी बात बड़ी नहीं होती उसे सोच सोच कर बड़ा बना देते हैं। बेहद की सोच रखने से छोटी-छोटी बातें स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं अर्थात् स्वार्थ से दूर निकल बुद्धि को विशाल और दुरांदेशी बनाईयें। उसके लिए अपने में सभी के प्रति शुभभावना और शुभकामना के लिए आध्यात्मिकता का सहारा लीजिये।

    3. चिंताओं को भागने के लिए औसत नियम का प्रयोग करिये

    औसत का नियम यह कहता है कि कभी किसी का कोई काम नहीं रूकता। आप भी अपने जीवन के अनुभव से सीख ले सकते हैं, वास्तव में कोई भी चिंता लगभग अनुमनित होती है उस का कोई विशेष आधार नहीं होता। लगभग 99% चिंताओं का कोई हमारे जीवन कोई सम्बन्ध ही नहीं होता अर्थात् घटित नहीं होती। और कोई भी चिंता करने से हमें क्या नुकसान हो सकता है और कोई भी चिंता करने कभी क्या हमें कोई लाभ हुआ हैं अर्थात् हर स्थिति , परिस्थिति को ठीक से समझें।

    4. होनी के साथ सहयोग करिये

    जब कोई घटना घट चुकी तो उसके बाद उस पर चिंता करना तो मानो सांप निकल जाने के बाद उसकी लकीर को पिटने के समान है, क्योंकि जो समय या घटना हो चुकी। वह वापिस कदापि नहीं आयेंगा तो होनी को स्वीकार करना ही मन की शान्ति को कायम रखने की बुहत अच्छी विधि भी और इसी में कल्याण भी है।


    5. चिंताओं को आवश्यकता से अधिक मूल्य मत दीजिये 

    चिंताओं को आवश्यकता सेे अधिक मूल्य मत दीजिये क्योंकि ज्यादातर चिंतायें वास्तव में आधारहीन और मन की ऊपज होती है जो कभी जन्म ही नहीं लेती। उसमे में हम अपनी ऊर्जा और समय और कभी -कभी अपने सम्बन्धों को भी नष्ट कर देते है। यदि किसी बात को महत्व ही नहीं देगे, व्यर्थ में चिंता नहीं होती।

    6. बीती बातों को लेकर चिंतित न रहिये

    बीती बात को भूलने के लिए उससे शिक्षा लेते हुये अपने वर्तमान को बुहत सुन्दर और सफल बनाईये और परमात्मा में पूर्ण विशवास रखिये। गीता के शब्द सदा याद रखिये कि जो हुआ वह अच्छा और जो चल रहा है वह भी अच्छे-से-अच्छा और जो होने वाला वह बुहत अच्छा ही होगा।

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