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Apr 21, 2018

भारत का इतिहास - History of India

भारत का इतिहास

इतिहास तीन शब्दों इति+ह+आस् से मिलकर बना है  जिसका अर्थ है ऐसा निश्चित रूप से हुआ। इतिहास अतीत को जानने का एक साधन है​।
► ​किसी समाज या राष्ट्र के इतिहास के अध्ययन के द्वारा हम उस समाज या राष्ट्र के अतित  को जान सकते हैं। यहां अतीत से हमारा तात्पर्य उस राष्ट्र की संस्कृति और सभ्यता से है​।
​► प्रत्येक देश अथवा राष्ट्र की अस्मिता की पहचान उसकी संस्कृति और सभ्यता से ही की जाती है। संस्कृति के अंतर्गत मानव के समस्त क्रियाकलाप आते हैं जबकि सभ्यता के अंतर्गत उसके भौतिक पहलुओं पर विशेष जोर दिया जाता है​। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत के इतिहास को इतिहासकारों ने तीन भागों में विभाजित किया है जिसके माध्यम से हमें भारत के संपूर्ण इतिहास की जानकारी का विवरण प्राप्त होता है​


►भारत का इतिहास तीन भागों में-​
1.  प्रथम भाग - भारत का प्राचीन इतिहास​
​3.  तृतीय भाग - भारत का आधुनिक इतिहास​

​इन तीनों काल के माध्यम से हमें भारत की विशेषताओं, भारत पर शासन करने वाले राजाओं और भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई के बारे में विस्तृत जानकारियां प्राप्त होती हैं​। भारत का इतिहास अत्यधिक विस्तृत होने के कारण इसे तीन भागों में विभाजित किया था ताकि इसके वर्णन को व्यवस्थित तरीके से सबके बीच में पहुंचाया जा सके​।

​1. प्राचीन भारत

​► भारत के इतिहास के प्राचीन काल से हमें भारत की विभिन्न संस्कृतियों सभ्यताओं पुरातात्विक स्त्रोत और स्थलों की जानकारी प्राप्त होती है​।
​► प्राचीन काल में भारत के विशाल उपमहाद्वीप को भारतवर्ष अथवा भरतो की भूमि के नाम से जाना जाता था। इस देश का भारत नाम करण ऋग्वैदिक काल के प्रमुख जन भरत के नाम पर किया लगता है​।
​► प्राचीन भारत के इतिहास के माध्यम से हमें प्राचीन भारत की सामाजिक संरचना, समय के अनुसार उसमें परिवर्तन,  द्वितीय नगरी क्रांति, मौर्य साम्राज्य और इसका  पतन, गुप्त काल, गुप्तोत्तर काल, संगम युग आदि  के बारे में विस्तृत जानकारियां प्राप्त होती हैं​।

​► मध्यकालीन भारत में इस्लाम का उदय हुआ था जिस के संस्थापक मोहम्मद साहब कुरैश जन जाति के थे।​
► इस काल में भारत में प्रवेश करने वाले मुस्लिम शासकों के बारे में जानकारी दी गई है। इसी काल में विदेशों के द्वारा भारत पर हुए आक्रमण के बारे में बताया गया है​।
​► इसी काल में भक्ति और सूफी आंदोलन का किस प्रकार प्रचार प्रसार हुआ और किस प्रकार इनको को बढ़ावा मिला इस की संपूर्ण जानकारी मध्यकाल के इतिहास से प्राप्त होती है​।
► इसी काल में भारत के महान गुरुओं आचार्य का जन्म हुआ जिनके द्वारा हमारी भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार हुआ और हमें कहीं महापुरुष मिले​।

​3. आधुनिक भारत

► भारतीय इतिहास का तीसरा भाग आधुनिक काल है। प्राचीन काल में यूरोप और भारत के बीच व्यापारिक संबंध यूनानियों के साथ आरंभ हुए। मध्यकाल में यूरोप का भारत से व्यापार कई मार्गो से होता था​।
► एक मार्ग फारस की खाड़ी तक समुद्र के रास्ते जाता था वहां से फिर इराक और तुर्की होकर जमीन के रास्ते आगे समुंद्र के जरिए वेनिस और जेनेवा तक जाता था​।
​► आधुनिक काल में यूरोपीय कंपनियों का भारत में आगमन हुआ जिनमें भारत आने वाले प्रथम  यूरोपवासियों में पुर्तगीत थे जिन्हें हम पुर्तगाली के नाम से जानते हैं। पुर्तगाली के बाद डच भारत ने भारत में प्रवेश किया इसके पश्चात अंग्रेजों का आगमन हुआ​।


​► जिससे अंग्रेजों का साम्राज्य भारत में स्थापित होने लगा और हमारा देश कई वर्षों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा। इसी बीच मराठा शक्तियों का उदय हुआ। इसी काल में मुगल साम्राज्य का पतन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और  भारत का आजाद होना और एक गणतंत्र राज्य बनना आदि की जानकारी हमें आधुनिक काल के इतिहास से प्राप्त होती है​।
​► 1857 की क्रांति जो की देश में बहुत प्रसिद्धि हुई थी जिसके बाद ही भारत में स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखने का कार्य शुरू किया गया, आधुनिक काल में ही प्रारंभ हुई थी​।
► आधुनिक काल में विभिन्न जातियों मजदूर संघ और किसानों के आंदोलन हुए इसी काल में ब्रिटिश राज का भारत के आर्थिक क्षेत्र पर भी गहरा प्रभाव पड़ा था​।
► इसी काल में कहीं धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में सुधार हेतु आंदोलन किए गए संस्थाओं की स्थापना की गई प्राचीन समय से चली आ रही कई प्रथाओं के खिलाफ धरना प्रदर्शन और आंदोलन किए गए​।

इन्हीं तीनों कालों के माध्यम से हमें भारत के संपूर्ण इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है जो कि हमें भारत का इतिहास जानने में बहुत ही सहायक होती है​। और हमें भारत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती है।​ इसी के माध्यम से आज हम मध्यकाल का भारत के बारे में जानकारियां प्राप्त करेंगे अगर इसमें कोई भी गलती हो या टाइपिंग मिस्टेक हो तो आप सभी अवश्य पढ़ कर हमें बताएं और सुधार करवाएं

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