भारत का मध्यकालीन इतिहास - Medieval history of India / part-1 - EXAM PREPARE : Prepare For Any Exam -->

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Apr 21, 2018

भारत का मध्यकालीन इतिहास - Medieval history of India / part-1

भारत का मध्यकालीन इतिहास - Medieval history of India -1

​► मध्यकालीन भारत की शुरुआत इस्लाम के उदय के साथ हुई थी। मध्यकालीन भारत में भारत पर विदेशों के द्वारा हुए आक्रमण की जानकारी प्राप्त होती है​।
​► मध्यकालीन भारत में कई मुस्लिम वंश का उदय हुआ था जिनमें मुल्क वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश, सैय्यद वंश, लोधी वंश, मुगल वंश आदि प्रसिद्ध है। जिन्होंने भारत पर समय-समय पर आक्रमण किए और राज किया​।
► मध्यकालीन भारत में ही सूफी और भक्ति आंदोलन का जन्म हुआ। इसी काल में हमें ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, कुतुबुद्दीन बख्तियार, काकी शेख, हमीमुद्दीन नागौरी, शेख निजामुद्दीन औलिया, शेख नसीरुद्दीन चिराग, देहलवी, ख्वाजा सय्यद मोहम्मद, गेसुद राज आदि सूफी आंदोलन के प्रवर्तक मिले थे​।
► भक्ति आंदोलन का इसी काल में जोरों-शोरों से आगमन हुआ था। 
नोट :- भक्ति आंदोलन की शुरुआत रामानुज ने दक्षिण भारत में की थी​।
​► शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, निंबार्काचार्य, माधवाचार्य, रामानंद, कबीर दास, गुरु नान,  सूरदास, वल्लभाचार्य, चैतन्य, मीराबाई, तुलसीदास, दादू दयाल, रज्जब, नामदेव एकनाथ, रामदास आदि महान संतों का जन्म मध्यकाल के भारत में ही हुआ था। जिन्होंने हमारे देश की सभ्यता संस्कृति का विकास किया था​।

​► अरबों का सिंध पर विजय प्राप्त करना और अरब द्वारा भारत पर पहला मुस्लिम आक्रमण इसके अतिरिक्त महमूद ग़ज़नवी और गोर राजवंश की विस्तृत जानकारी का वर्णन मध्य काल के भारत में किया गया है जिसके माध्यम से हमें इन सभी मुस्लिम वंश के शासकों की जानकारियां प्राप्त होती हैं​    

इस्लाम का उदय (मोहम्मद साहब का परिचय)​

खुदा के प्रति पूर्ण समर्पण ही इस्लाम हैं​ इस्लाम का उदय मक्का में हुआ था इसके संस्थापक मोहम्मद साहब कुरैश जनजाति के थे। इनका जन्म 570 ईस्वी में मक्का में हुआ था इनके पिता अब्दुल्ला की मृत्यु उनके जन्म के पूर्व ही हो गई थी 6 वर्ष की अवस्था में इनकी माता अमीना का भी देहांत हो गया था अतः उनका पालन पोषण इनके चाचा अबू तालिब ने किया जो कबीले के स्वामी थे​। मोहम्मद साहब की बाल्यावस्था निर्धनता में व्यतीत हुई​ क्योंकि उनके चाचा अबू तालिब की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी​


बचपन में मोहम्मद साहब बकरी की समूह की देखभाल करते थे किंतु युवावस्था में उन्होंने कारवां का प्रबंध करने में एक ईमानदार और विश्वसनीय कार्यकर्ता के रूप में अपने लिए जीविकोपार्जन का एक अच्छा साधन बना लिया था​​। ​25 वर्ष की अवस्था में उन्होंने एक 40 वर्षीय धनी महिला खतीजा से विवाह किया​ विवाह के पश्चात भी हजरत मोहम्मद धार्मिक खोजों में लगे रहे​ 40 वर्ष की अवस्था में उन्हें एक देवदूत जिब्राइल का संदेश मिला जिसके फलस्वरुप उन्हें यह अनुभूति हुई कि वह एक नबी( सिद्ध पुरुष )और रसूल( देवदूत) हो गए और उन्हें ईश्वर के संदेशों का प्रचार करने के लिए संसार में भेजा गया है​​
    
    ​इस घटना के उपरांत पैगंबर मोहम्मद ने अपना शेष जीवन ईश्वर के संदेशों को संसार में प्रचारित करने में व्यतीत किया​ उन्होंने अरब में प्रचलित अंधविश्वास व मूर्ति पूजा की घोर निंदा की थी​ मूर्तिपूजक अरबों को यह बताया कि जिन देवियों की वह अल्लाह की पुत्रियां समझ कर पूजा करते हैं​ उनका कोई अस्तित्व नहीं है अल्लाह की सीधे आराधना करनी चाहिए​​। इस्लाम का आधार एकेश्वरवाद है​ 3 वर्ष तक  गुप्त रुप से इस्लाम का प्रचार करने के बाद हजरत मोहम्मद साहब को खुलेआम प्रचार करने का देवीय आदेश हुआ फलस्वरुप उनका विरोध होना आवश्यम्भावी था​​। कुरैश कबीलो (मोहम्मद साहब के संबंधित) का मक्का पर अधिकार थाजहां 360 मूर्तियां थी​ इन मूर्तियों की आय से इस कबीले के लोगों (मोहम्मद साहब के संबंधी) का जीवन निर्वाह होता था​ इन लोगों ने मुहम्मद साहब का विरोध किया​ उनके जीवन का अंत करने का प्रयत्न किया​​
   इसी बीच मुहम्मद साहब की पत्नी खतीजा व चाचा अबू तालिब का 619 ईस्वी में देहांत हो गया। हालाकी उनके चाचा अबू तालिब ने मोहम्मद साहब का धर्म स्वीकार नहीं किया लेकिन उन्हें अपने कबीले का संरक्षण प्रदान किया था​​। अबू तालिब की मृत्यु के बाद कबीले के नए प्रधान अबू जहल ने हजरत मुहम्मद को अपने कबीले की ओर से संरक्षण देना बंद कर दिया​  हजरत मोहम्मद की स्थिति एक समाज बहिष्कृत व्यक्ति जैसी हो गई थी​​
नोट्स:- ► मोहम्मद साहब मक्का गए-​622 ईसवी में​​ ► मक्का जाना कहलाया-​ हिजरत​। ► हिजरी संवत का आरंभ-​ 622 ईसवी में​​ ► हिजरी संवत का आरंभ-​ मोहम्मद साहब का मक्का त्यागकर मदीना जाने की स्मृति में​​ ► मक्का में आदेश दिया-​ अल्लाह एक है और मोहम्मद अल्लाह का पैगंबर है​​ ► पांच कर्तव्य की पूर्ति करना-​ मोहम्मद साहब के अनुयायियों के द्वारा​। ► सदका -​ऐच्छिक कर/जकात-​ धार्मिक कर ​। ► प्रथम मुस्लिम शासक-​ मोहम्मद साहब​। ► शासन का आधार था-​ कुरान​​ ► जवाबित कहा जाता है-​ कुरान के धार्मिक कानून को ​► मदीना पर कुरैशों के आक्रमण हुए -​ तीन युद्ध हुए ► मोहम्मद साहब का निधन -​ 632 ईस्वी में (65 वर्ष की आयु में)

​इस्लाम के चार प्रमुख खलीफा

खलीफा शब्द का उपयोग मोहम्मद साहब के उत्तराधिकारी के रूप में किया गया​ इस्लाम धर्म के चार प्रमुख खलीफा थे -​
1. अबूब्रक,    2. उमर,    3. उस्मान,    4. अली
​इसमें से इस्लाम धर्म के सबसे पहले खलीफा अबूब्रक बने जो की कुरैशी जन जाति के थे​​

​1. अबूब्रक (632-634 ईस्वी​)

​► अबूब्रक इस्लाम धर्म के सबसे आरंभिक अनुयाई थे​ उन्होंने संपूर्ण भारत और उसके पड़ोसी राज्यों को जीतने का प्रयत्न किया​ इस उद्देश्य से उन्होंने 11 सैनिक दल का गठन किया​​
► ​1 वर्ष में समस्त अरब देश में एक निर्विरोध केंद्रीय सत्ता द्वारा शांति स्थापित कर दी गई​ उनके शासन के दूसरे काल में अरब सेनाओं ने चेल्डिया (इराक) और सीरिया पर आक्रमण किया​​
​► उन्होंने बिजेण्टाइन राज्य के विरुद्ध सेना का नेतृत्व किया और सासानिद के विरुद्ध विजय प्राप्त की। इन सफलताओं के कारण अबूब्रक को विश्वास और सम्मान मिला​​
​► 13 अगस्त 634 को अबूब्रक की मृत्यु हो गई​ अपने अंतिम दिनों में उन्होंने उमर को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था​​

​2. उमर (634-644 ईस्वी)​

​► उमर खलीफा की उपाधि के साथ-साथ आमिर उल मुमिनीन (अनुयायियों का सेनानी) का विरुद धारण किया​​
► अबूब्रक की भांति उन्होंने भी विस्तारवादी नीतियों का अनुसरण किया​ उन्होंने सीरिया और सासानिद  राज्य पर विजय प्राप्त की​ और मिश्र को भी इस्लामी गणराज्य में मिलाया​​
​► सुव्यवस्थित शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रत्येक देश को प्रांतों में बांटा गया और जमीन का बंदोबस्त और जनगणना की गई​​
►  उमर के बाद तीसरे खलीफा उस्मान बने​​

​3. उस्मान (644 से 656 ईसवी​)

► उस्मान तीसरे खलीफा बने थे जिस समय वह खलीफा नियुक्त हुए उस समय उनकी आयु 70 वर्ष थी​
​► इनके समय में इस्लाम के अनुयायियों में पक्षपात ईर्ष्या और स्वार्थ की भावना प्रबल हो गई फलस्वरुप चारों और अशांति हो गई​​
► उस्मान के विरुद्ध यह आरोप लगाया गया कि वह अपने ही कबीले के व्यक्ति की नियुक्ति करते हैं और मोहम्मद साहब के कबीले बनीहाशिम के अधिकारियों की उपेक्षा करते हैं​​। इन कारणों से उस्मान ने जनता के स्नेह और सम्मान को खो दिया​​
​► 17 जून 654 में कुछ विद्रोहियों द्वारा कुरान पढ़ते समय उनकी हत्या कर दी गई​​
​​► उस्मान के पश्चात चौथे खलीफा अली बने थे​

4. अली (656 से 661 ईसवी)

​► उस्मान के बाद अली चौथे खलीफा बने थे​ अली का खिलाफत अधिकांशत: युद्धो का युग रहा​​। चुकी मदीना खिलाफत के साम्राज्य में संपन्न प्रदेशों से बहुत दूर स्थित था इसलिए अली ने कूफा को अपनी राजधानी बनाने का निर्णय किया​​
► खलीफा उस्मान के समय में मुसलमानों में प्रारंभ हुई ईर्ष्या, पक्षपात व विरोध अली के समय में चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया था​​
​► 25 जनवरी 661 ईसवी को अली की मृत्यु हो गई​ अली की मृत्यु के बाद अली के जेष्ट पुत्र हसन को खलीफा चुना गया किंतु उन्होंने मुआवियों के पक्ष में खिलाफत की पदवी छोड़कर मदीना चले गए​​

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